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Sunday, November 23, 2008

पान

कसम से, क्या चीज़ है पान। खुदा की बनाई सबसे बड़ी नेमत है पान। हरे हरे देसी पान का पत्ता, उसपर बढ़िया चूना कत्था और भीगी डली। भोला बत्तीस तो अब जल्दी मिलता नही, तुलसी या बाबा मिल जाता है। और हाँ, किमाम इलायची भी जरूर होना चाहिए। पंडित जी लपेट कर जैसे ही दें, तुरंत मुह मे जाकर सेटिंग करने लगता है। और ये कोई आज से नही। दरअसल ब्रम्हा पान खाते थे। गिलौरी मुह मे रखकर ही सरस्वती को पढाते थे। बिना पान के हमारे प्राइमरी के मास्टर तक नही पढाते। वो तो खैर ब्रम्हा थे। सुना है, नारद को पान की आदत ब्रम्हा से ही लगी। तभी तो एक बार नारद ने विष्णु वाजपेयी के घर जाकर उन्हें पान की महिमा बताई थी। उन्होंने बताया था, सारे देश को पान की आदत डलवा दो, राजकोषीय घाटा कम हो जाएगा। पान खाने के बाद तो सुरती भी बेकार हो जाती है। कचहरी मे वकील भी तो पान खाते हैं, बिजली ऑफिस मे बैठे एस डी ओ भी तो पान खाते हैं। जितने भी भगवान् हैं, सब पान खाते हैं , चाहे आर टी ओ भगवान् को देखिये या फिर चाहे एस डी एम् भगवान् को देखिये, सब पान खाते हैं। तो भइया, पान की महिमा अपरम्पार है। एक बार नारद ने पान खाकर मुरली मनोहर के गमले मे थूक दिया। फ़िर क्या था, वहा से पान की जो बेल निकली, आज तक मुरली वाले के होठो का कोना लाल किए रहती है। और मुरली वाले ने बंसी छोड़ कर पानदान अपना लिया, कांख मे दबाये रहते हैं हमेशा। और तो और, पूरा देश पान की जुगाली मे व्यस्त है, आलू के दाम बढे, सब चिल्लाए, टमाटर सूरज की तरह लाल हो गया, सब घर छोड़ कर बाहर आ गए, लेकिन पिछले एक साल मे पान की कीमतों मे तीन बार इजाफा हुआ, मजाल है की पान की गिलौरी ने किसी के मुह से आवाज निकलने दी हो। मुह की आवाज दबानी हो तो पान खिलाइये, मुह से सुंदर सुंदर राग निकालने हो तो पान खाइए। पान पान पान ..... बस पान।

12 comments:

Bhuwan said...

हिन्दी ब्लॉग जगत में नया ब्लॉग आया है.. अच्छी पोस्ट के साथ अच्छी शुरुआत...बधाई स्वीकार करे..

Udan Tashtari said...

आह!! गुरु जी, अब हम भी जान गये कि हमें पान इतना क्यूँ पसंद है.. :)

बेहतरीन!!

हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका हार्दिक स्वागत है. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाऐं.

एक निवेदन: कृप्या वर्ड वेरीफिकेशन हटा लें तो टिप्पणी देने में सहूलियत होगी.

Suresh Chiplunkar said...

बहुत बढ़िया लिखा है जी, आपके "जाने-चीन्हे" तो बहुत ही दिग्गज लोग हैं फ़िर आप ब्लॉग जगत में नये कहाँ रहे… ब्लॉग जगत में आपका हार्दिक स्वागत है, एक अर्ज है कि वर्ड वेरिफ़िकेशन हटा दें, यह व्यवधान उत्पन्न करता है… मेरी शुभकामनायें…

Amit K. Sagar said...

ब्लोगिंग जगत में आपका स्वागत है. लिखते रहिये.

Avtar Meher Baba said...

Very Good. A pan a day is very good for health but ofcourse without tobacco.
Love
Dr. Chandrajiit Singh
chandar30(at)gmail.com
lifemazedar.blogspot.com
mazedarindainfoodconcept.blogspot.com
avtarmeherbaba.blogspot.com
kvkrewa.blogspot.com

बी एस पाबला said...

पान का प्रशंसा पुराण बढ़िया लगा। नियमित लेखन के लिए शुभकामनाऐं

वर्ड वेरीफिकेशन हटा लें तो टिप्पणी देने में सहूलियत होगी.

Jyotsna Pandey said...

चिट्ठाजगत में आपका हार्दिक अभिनन्दन है, आपकी लेखनी का स्वाद लेना शेष है शीघ्र ही एक अन्य टिप्पणी आपके ब्लाग पर होगी !आपसे अनुरोध है कि मेरे ब्लाग पर भी भ्रमण करें और अच्छी या बुरी जैसी भी पाठ्य सामग्री हो टिपण्णी अवश्य दें!

irdgird said...

तंबाकु बुरी चीज है जी लेकिन का करें जब पान हो और बनारसी जर्दा तो भैया दिमाग चाक-चौबंद हो जात है।
पान के साथ आएं हैं आप जी तो स्‍वागत है आपका।sh

रचना गौड़ ’भारती’ said...

भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
लिखते रहिए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल और शेर के लिए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
www.zindagilive08.blogspot.com
आर्ट के लिए देखें
www.chitrasansar.blogspot.com

नारदमुनि said...

paan to kisi ko bhee apni jaan bana leta hai. narayan narayan

संजीव said...

वर्ड वेरिफिकेशन हटा लिया है, असुविधा के लिए माफ़ी... ब्लॉग पसंद आया, इसके लिए कोटि कोटि धन्यवाद

संगीता पुरी said...

आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है। आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे । हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।