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Tuesday, December 16, 2008

किसके पास है इसका जवाब

आशीष मिश्र, एमएचवन न्यूज़ चैनल के पत्रकार हैं। उन्होंने संसद पर हमले की बरसी के तुरंत बाद मुझे एक मेल के जरिये नेताओं के चाल-चरित्र को लेकर टिप्पणी भेजी थी। व्यस्तता की वज़ह से उसे तुरंत प्रकाशित नहीं किया जा सका....लेकिन उनका सवाल मौजूं है-
गुरुवार को शपथ लिया, शनिवार को भूल गए...ये हमारे नेता हैं। प्रणव मुखर्जी का कहना है कि आतंक की धुरी है पाक़...आडवाणी के हम एक सौ पांच का उद्धरण...और राहुल गांधी के सिपाही के साहस पर दिया गया भाषण देश ने ग़ौर से सुना। लेकिन महज दो दिनों बाद, जब संसद और सांसदों की हिफ़ाजत में नौ शहीदों को याद करने की बारी आई तो महज बारह सांसदों ने ही संसद में आने की ज़हमत उठाई। कथनी और करनी में फ़र्क का इससे चुभता उदाहरण आप ढूंढ़ते रह जाएंगे...शायद मिले नहीं। पत्रकार प्रमोद बिष्ट की पत्नी सुनीता बिष्ट हमारे कार्यक्रम में आई थीं, उन्होंने बताया कि उनसे जितने वायदे किए गए, कोई पूरा नहीं हुआ।...ये हैरान करने वाला था। निजी तौर पर मुझे यक़ीन नहीं हुआ कि ऐसा भी हो सकता है। लेकिन शहीद हुए प्रमोद बिष्ट की पत्नी एक हक़ीकत के रूप में हमारे सामने थीं। वो कह रही थीं कि शीला दीक्षित ने कहा था कि रोज़गार देंगी..बाद में कहा देखेंगी...और अब तो ये आश्वासन भी नही। मित्रों, अगर इसके बाद भी नेताओं की जमात से आप उम्मीद बांधे बैठे हैं तो बीजेपी के प्रकाश जावड़ेकर का बयान भी कम हैरानी भरा नहीं है। संसद पर हमले की बरसी पर गिनती के सांसदों की संसद में मौजूदगी पर उन्होंने कहा कि- शनिवार या रविवार को हर कोई मौजूद नहीं हो सकता। सांसदों को उनके इलाके में भी जाना होता है। प्रकाश जी, सांसदों के लिए शायद संसद भवन भी अपना ही इलाक़ा होता है। और क्यों शनिवार या रविवार को उपस्थित नहीं हो सकते सांसद। क्या आप ये कहना चाहते हैं कि हर सांसद शनिवार और रविवार को अनिवार्य रूप से अपने इलाके में ही होता है? क्या आप ये कहना चाहते हैं कि हमारे सांसदों के लिए सप्ताहांत में अपने क्षेत्र में जाना इतना जरूरी है कि संसद पर हमले की बरसी पर भी मौजूद नहीं रह सकते? इन सब नेताओं के लिए सुनीता बिष्ट एक सवाल हैं...संसद पर हमले के दौरान शहीद हुए प्रमोद बिष्ट की विधवा को उसका हक़ और सम्मान नहीं दिला सकने वाले सांसद देश के लिए आखिरकार क्या और कितना कर पाएंगे सोचने वाली बात है।

2 comments:

सुशील कुमार छौक्कर said...

इन नेताओं में तो अब लगा चुका जंग

आओ खुद ही लड़ जाए जिदंगी की जंग।

RAJIV MAHESHWARI said...

पहेले अपना पेट भर ले फ़िर देखेगे शहीदों को .

राजीव महेश्वरी