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Monday, December 22, 2008

अंतुले के बयां से ठीक से निबटना चाहिए

अंतुले के ताज़ा बयां पर सवाल उठ रहे है। इस बयां को टीवी जर्नलिस्ट गंगेश जी ने नए सवालो के साथ देखा है, जो ज्यादा गंभीर है-
ए आर अंतुले के बयान पर राजनीतिक तूफान खड़ा हुआ....ये किसी आश्चर्य से कम नहीं क्योंकि ये राजनीतिक मामला है ही नहीं....दरअसल इस पर तो जांच होनी चाहिए कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भारत के दावों पर शक करने की गुंजाइश देने वाला ये बयान आया क्यों....ये सिर्फ राजनीतिक लाभ या वोट बैंक की राजनीति कतई नहीं है जैसा कि राजनीतिक दलों को लगा...मुस्लिम वोट या सहानुभूति लेने के और भी कई तरीके सियासतदानों को मालूम हैं और अब तक उसी रास्ते का इस्तेमाल कर वो ये हासिल भी करते रहे हैं......हां अगर कोई नया नेता इस तरह का बयान देता तो ये माना जा सकता था कि उसकी ये नासमझी है लेकिन अगर अंतुले जैसा सीजन्ड नेता इस तरह के बयान देता है तो इसके पीछे के कारणों की समीक्षा की जानी चाहिए....राजनीतिक हो हल्ला इसका निवारण नहीं है.....अंतुले के बयान से कई कड़ियां जुड़ती हैं....जांच एजेंसियों को पता करना चाहिए कि उनके बयान के पीछे कहीं `विदेशी हाथ' तो नहीं....लोग सवाल उठा सकते हैं कि ऐसे वरिष्ठ नेता पर इस तरह के आरोप लगाना ठीक नहीं लेकिन ऐसे सवाल उठाने वालों को एक बार उन घरों में झांक आना चाहिए जिन घरों में मुंबई हमलों के बाद से रोशनी नहीं हुई....माफ कीजिए वरिष्ठ और कनिष्ठ का सम्मान बाद में कर लेंगे फिलहाल तो हिसाब करने का वक्त है....राजनेताओं की भी जुबानी मानें तो देश एक अघोषित युद्ध लड़ रहा है और इसमें पीठ पर छुरा घोपने वालों के लिए बस एक ही सजा मुकर्रर है....मैं जो कह रहा हूं उसमें बौद्धिकता तलाशने की न कोई जगह है और न ही इजाजत ...ये खरा खरा कह देने का समय है....अंतुले साहब के बयान पर किसी निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले कुछ तथ्यों का ध्यान रखा जाए तो बेहतर होगा.....मुंबई हमलों के बाद सबसे ज्यादा निशाने पर है दाउद और उसका गिरोह.....दाउद का संबंध महाराष्‍ट्र से रहा है और उसका साम्राज्य राजनीति, पुलिस और अपराध के नेक्सस के कारण ही फला-फूला......अंतुले का राजनीतिक जीवन भी महाराष्ट्र से जुड़ा है.......हो सकता है उनका कोई संबंध दाउद से न हो लेकिन इस संयोग पर सुरक्षा एजेंसियों को तफ्तीश तो कर ही लेनी चाहिए.....संयोग के दायरे में ये भी है कि दाउद का साम्राज्य जब फैला तो महाराष्ट्र में किन राजनेताओं की तूती बोलती थी और उनके आय के साधन क्या हैं और क्या रहे हैं.....क्योंकि अंतुले के बयान का दूसरा लाभ सीधा पाकिस्तान को पहुंचा है.....इसने ये शक भी पैदा किया है कि क्या कुछ राजनेता विदेशी हाथों में भी खेलते हैं.....ये सवाल और शक इसलिए ज्यादा गहरे हैं क्योंकि अंतुले कोई आम राजनीतिज्ञ नहीं....इनकी जुबान फिसल नहीं सकती और अगर फिसलती तो वो अपने बयान पर सफाई दे सकते थे....इस समय वो अपने बयान पर कायम हैं, शुक्र है मीडिया ने उस बयान का फॉलोअप ज्यादा देर और दूर तक नहीं किया कम से कम अंतुले के एंड पर .......नहीं तो पता नहीं आतंकवाद के मुद्दे पर देश को किस दोराहे पर खड़ा कर देते अंतुले.....कांग्रेस ने तत्काल ये फैसला लेकर कि इस बयान से पार्टी का कुछ लेना देना नहीं, स्थिति संभाली....ये भी ठीक हुआ कि इस पर विपक्ष ने ज्यादा देर तक तमाशा नहीं किया क्योंकि इस पर जितनी देर तक तमाशा होता रहता दुनिया की नजर उतनी ही देर तक इस पर बनी रहती......इसलिए अंतुले के बयान पर उन्हें माफी या सजा नैतिक आधार पर नहीं बल्कि कानून सम्मत तरीके से दी जानी चाहिए....महज राजनेता होने की वजह से उन्हें माफी या सजा देना उनके अपराध को कम करना होगा.....उनके बयान पर संजीदगी से सोचने का समय है

3 comments:

विनय said...

जी जनाब बिल्कुल सही कह रहे हैं

cmpershad said...

क्या ये वही अंतुले तो नहीं है जो दाउद के ज़माने में सिमेंट स्केंडिल के कारण इस्तेफा दे दिया था। ऐसे सज्जन पुरुष को सताना तो भारत के लिए शर्म की बात है ही।

manish said...

antulyjaise log aisa hibayan de sakte the