Pages

Monday, December 1, 2008

ताकि सनद रहे ...

ये अगर शहीद संदीप उन्नीकृष्णन का घर नही होता तो कुत्ता भी इस घर में नही आता- अच्युतानंदन, सीएम, केरल।


मै जबतक वहां पहुँचा, आतंकवादी भाग चुके थे- शिवराज पाटिल, पूर्व गृहमंत्री, भारत सरकार।


इतने बड़े शहर में एकाध हादसा हो जाता है- आरआर पाटिल, पूर्व उप मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र।


लिपिस्टिक लगाकर और जींस पहनकर नारे लगा रही महिलाये कश्मीरी अलगाववादी की तरह व्यवहार कर रही थी- मुख्तार अब्बास नकवी, प्रवक्ता, बीजेपी।
अभिनेता बेटा और निर्देशक रामू को ताज हादसे वाले दौरे के समय ले जाना ग़लत नही, रामू कोई आतंकवादी नही- देशमुख, सीएम, महाराष्ट्र।


मित्रों, इन बयानों के बाद कुछ कहने की जरूरत शायद नही रह जाती है। ये सब बयान, जैसा कि आपको मालूम है, मुंबई धमाकों के बाद हमारी बजबजाती सियासत के गलीच जानवरों के है....जो ख़ुद आदमी होना चाहेंगे , न कोई उन्हें आदमियों में गिनना चाहेगा। मनुष्यता की सारी पहचान खो चुके है। गिन-गिन कर देख लीजिये॥ हर एक को गौर से सुन लीजिये.


जिनसे सबसे ज्यादा शिकायत और जिनपर सबसे ज्यादा गुस्सा...वो सबसे पहले...यानी, केरल के सीएम। कामरेड , तुमने तो बिल्कुल ही हद कर दी....मुझे तुम्हारे बयान से जितनी शर्मिंदगी है, औरो पर उतनी नही। मै तो समझ रहा था की तुम भी आदमी हो...लेकिन तुम तो मामूली किस्म के सीएम निकले। चलो कामरेड , तुम्हारी भी सही वक्त पर पहचान हो गई। कम-से-कम ताज़ा पीढी तो सही ढंग से तुम्हारी और तुम्हारे नस्ल की पहचान कर पायेगी..पहले के लोगो को तो तुम्हारे वामपंथ ने खूब सपने दिखाए ।


हमारे दोनों पाटिल साहब का तो क्या कहना। इन दोनों ने तो भारतीय राजनीति में जो मिसाल कायम की है...वो लंबे समय तक जेहन में जिन्दा रहेगी। नफीस बड़े पाटिल साहब जिस अंदाज में गृह मंत्रालय सँभालने की शुरुआत की थी, अपने इस्तीफे की घोषणा के वक्त भी उनके चेहरे पर किसी तरह की शर्मिंदगी या पछतावा नही था। कुछ महीने सत्ता में रहने का अफ़सोस जरूर रहा होगा। नक्सलवाद और सूट बदलने वाले मामले के बाद बड़े पाटिल साहब ने मुंबई बम धमाकों के बाद जो बयान दिया उसे सुनकर या तो आप अपना सर पीट लें, या उनके जैसे तमाम नेताओं का। उन्होंने कहा कि उनके पहुचने से पहले सारे आतंकवादी भाग चुके थे। ये अलग बात है कि दो दिनों तक पूरी मुंबई या .... या फ़िर कहिये हिन्दुस्तान की आत्मा को आतंकवादियों ने बंधक बनाये रखा ।


छोटे पाटिल साहब बिहार के युवक राज पर गोलियां चलवाकर जिस अंदाज में गोली का जवाब गोली से देने की बात कही थी, इस बार भी उनका अंदाज़ उतनी ही बेशर्मी भरा रहा। उन्होंने ताज हमले को मामूली हादसा बताया और कहा कि बड़े शहरों में ऐसा होता है। ....शायद पाटिल जैसे बड़े लोग ऐसी छोटी छोटी ही बातें करेंगे।


सबसे कम शिकायत बी जे पी के नकवी साहब से है। उन्होंने जो कुछ कहा, उनके चाल चरित्र पर मुफीद बैठता है। उन्होंने कहा कि हादसे का विरोध प्रायोजित था, और उसमे शामिल महिलायें किसी के कहे पर नारेबाजी कर रहे थे। उन्होंने तो इस प्रदर्शन को लोकतंत्र विरोधी भी बता दिया। ....नकवी साहब ने हम सब को लोकतंत्र की नई परिभाषा बताई, इस मुल्क को लोकतंत्र का नया चेहरा दिखाया। हम सभी को उनका शुक्रगुजार होना चाहिए।

3 comments:

umeshawa said...

नकवी जी के बयान को आप गलत लिख कर घुमा रहे है। उनका आशय यह था की आप आतंकवाद की घटना के बहाने सारे लोकतंत्र और राजनेताओ के प्रति अनास्था पैदा करने की कोशीस करे यह उचित नही है। साथ ही उन्होने यह भी कहा की लिपस्टीक लगा कर मोमबती हात मे ले कर पश्चिम का अन्धाकुरण करते हुए कुछ विदेशी एनजीओ के मंच पर जो हमारी बहनो द्वारा यह बात कहे जा रही है वह गलत है। देश चलाने के लिए राजनेता चाहिए, हम विदेशीयो को बुला कर देश चलाने की जिम्मेवारी नही दे सकते। अतः नकवी जी की भावना मे मुझे कुछ गलत नही लगता। इन विदेशी एनजीओ से बच कर रहे।

Dipti said...

इस हादसे ने न सिर्फ़ देश की सुरक्षा व्यवस्था की कलई खोल दी है। बल्कि, नेताओं के ढीढपने को भी बाहर ला दिया है। ये ओछे नेता ख़ुद को परब्रह्म समझने लगे थे। वैसे भी एक कथन है कि - विनाशकाले विपरीत बुद्धि। नेताओं का हाल भी फ़िलहाल कुछ ऐसा ही हैं। ये जानते बूझते कि उनके खिलाफ़ लोगों में गुस्सा है वो अपनी बकवास सोच उगले जा रहे हैं। कहते है ना कुत्ते की दुम...

PANKAJ MISHRA said...

सर,
हमरे कुच नेता अग्रेज के जमाने के --- है. पइप सीधा हो जाएगा लेकिन ये सीधे नही होगे.
अब नया रास्ता खोजना होगा.