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Sunday, January 11, 2009

स्टिंग आपरेशन बना सबूत

कुंदन शशिराज, एमएचवन न्यूज के जर्नलिस्ट हैं। उन्होंने स्टिंग आपरेशन और उसके कानूनी साक्ष्य बनने के बारे में लिखा है। कुंदन, काफी समय कोबरा पोस्ट की टीम में भी रह चुके हैं और उसके एक स्टिंग आपरेशन को नजदीक से देखा-समझा है। शायद इसलिए हक़ के साथ इस मद्दे पर वो बेहतर कह पाए हैं।बीस अक्तूबर २००८ को पटियाला हाउस कोर्ट ने चंद्रशेखर को दो साल कैद की सज़ा सुनाई। हालांकि ये बेहद मुश्किल है कि आप चंद्रशेखर को जानते हों। पूरा मामला भी बेहद पुराना है। दरअसल चंद्रशेखर २००६ में दिल्ली के नबी करीम इलाके में चलने वाली बहुचर्चित संस्था -प्रयास- का केयरटेकर हुआ करता था। वही प्रयास, जिसके कर्ताधर्ता कभी दिल्ली पुलिस के शेर रह चुके आमोद कंठ साहब हैं। लेकिन मजलूम बच्चों के उत्थान का दावा करने वाली इस संस्था के असली सच को इसी संस्था में काम करने वाले चंद्रशेखर ने ही अपने काले कारनामों से सबके सामने बेपर्दा कर दिया। दरअसल, इस संस्था के उस सेंटर में चंद्रशेखर जहां काम करता था, वहां से बच्चों को बेचने का काम होता था। बच्चे बिक गए तो बिक गए वरना उन्हें भाड़े पर देने का काम भी इसी सेंटर में चंद्रशेखर किया करता था। संस्था के इस काले कारनामे का भांडा फोड़ा कोबरा पोस्ट ने अपने एक स्टिंग आपरेशन के जरिये। ये तमाम खोजबीन और स्टिंग आपरेशन करने वाले पत्रकार थे हरीश शर्मा। मै भी उस वक्त कोबरा पोस्ट में ही बतौर खोजी पत्रकार काम करता था...और इस स्टिंग आपरेशन के कुछेक महत्वपूर्ण मौकों पर मुझे भी जाने का मौक़ा मिला। खासकर तब, जब चंद्रशेखर से मुलाकातों का दौर चल रहा था। उस वक्त मैं भी कई बार चंद्रशेखर से मिला। खैर, प्रयास की पोल खोलती ये पूरी स्टोरी पूरी की गई...और फिर बाद में स्टार न्यूज़ पर इसका प्रसारण भी हुआ। खबर चलने के बाद चंद्रशेखर की गिरफ्तारी हुई और पटियाला हाउस कोर्ट में मुकदमा चला। तकरीबन दो साल की सुनवाई के बाद स्टिंग आपरेशन और गवाहों के बयानों को आधार मानते हुए कोर्ट ने चंद्रशेखर को दोषी ठहराया। ..उसे दो साल कैद की सज़ा सुनाई।स्टिंग आपरेशन की वीडियो फुटेज को कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण सबूत माना। वीडियो फुटेज में जो भी सबूत पेश किए गए, उसकी तस्दीक के लिए कई गवाह कोर्ट में पेश हुए। वीडियो और आडियो की असलियत पर तकरीबन दो साल तक कोर्ट में बहस चली और आखिरकार कोर्ट ने भी स्टिंग आपरेशन के सच पर अपनी मुहर लगा दी। ये एतिहासिक तो था ही, लेकिन ऐसा नहीं था कि ये पहली बार हुआ था। इससे पहले भी कोर्ट ने स्टिंग आपरेशन को आधार मानते हुए एक बड़े मामले में ऐसा फैसला सुनाया कि कईयों की सोच बदल गई। मामला आपरेशन दुर्योधन का था। इस स्टिंग आपरेशन को पुख्ता आधार मानते हुए कोर्ट ने एतिहासिक फैसला सुनाया। लेकिन इसी फैसले के कुछ वक्त बाद उमा प्रकारण मामले से जुड़े विवाद ने स्टिंग आपरेशन की सच्चाई को काफी हद तक सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया।उमा खुराना प्रकरण के बाद भले ही एकबार स्टिग आपरेशन की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे , लेकिन चंद्रशेखर मामले में कोर्ट के फैसले ने कई चीजो को एकबारगी साफ कर दिया है। मसलन, खबरों की सही पड़ताल के बाद अगर आप सबूत जुटाने के लिए स्टिंग आपरेशन का सहारा लेते हैं तो फिर सामने आने वाला सच अपनी कहानी खुद कह देता है। स्टिंग आपरेशन को अर आप सबूत पेश करने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करेंगे तो सबूतों को नजरअंदाज करना मुश्किल होगा। बहरहाल, चंद्रशेखर मामले में कोर्ट के फैसले के बाद हमारे आत्मबल को संबल मिला है। ये यकीन पुख्ता हुआ कि सच के लिए लड़ी जाने वाली लड़ाई अपनी जीत आखिरकार ढूंढ़ ही लेती है। कोबरा पोस्ट में उस वक्त काम कर रहे तमाम दोस्त अब अल-अलग जगहों पर काम कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट का फैसला हम सबके लिए साझी खुशी लेकर आया।

1 comment:

Amit said...

bahut sahi..chaliye ham umeed kar sakte hain ki isse bade bade raaz ka pardaaphaas ho sakega....