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Friday, March 6, 2009

बापू हम शर्मिंदा हैं


बापू हम शर्मिंदा हैं। दुनिया ने गांधी की इस्तेमाल की हुई कुछ चीजों पर बोली लगाई। ...जो बेशक़ीमती थी। बेमोल थी। मगर दुनिया ने उसकी क़ीमत लगाई। ये जज्बातों पर लगाई गई बोली थी। बाक़ायदा नीलामी हुई... और ये विरासत या धरोहर लिकर किंग विजय माल्या की हो गई। उससे पहले गांधी की सियासी विरासत संभालने का दावा करने वाली कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार इस नीलामी को रोकने में विफल रही।... लेकिन इन सबके बीच क्या इसकी पहचान जरूरी नहीं की गांधी किसके थे... सिर्फ हिंदुस्तान के या फिर पूरे विश्व के एक महामानव। क्या ये जरूरी नहीं कि गांधी की असली विरासत की भी पहचान हो। क्या ऐनक, घड़ी जैसी चीजें गांधी की विरासत का प्रतिनिधित्व करती हैं...। गांधी की असली विरासत गांधी दर्शन और अहिंसा का उनका संदेश है। जिसपर हिंदुस्तान सहित पूरी दुनिया का हक है। इसकी चिंता बेवजह है कि कोई सिरफिरा गांधी के सामान की बोली लगाता है और कोई उसे ख़रीदने के लिए राजी हो जाता है...। गांधी के सामान की नीलामी का विरोध इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता कि कोई भी हिंदुस्तानी इस बोली में शामिल नहीं होता ... इसे ख़रीदने से मना कर देता। क्योंकि जिस वक्त हम इसे ख़रीदने को राजी हो गए... उसी वक्त हमने भी गांधी की विरासत की क़ीमत भी लगा दी।

10 comments:

sareetha said...

बापू हम वाकई शर्मिंदा हैं अपने नाकारापन पर ,अपने कुकर्म पर । जो गाँधी जीवन भर शराबबंदी का नारा देते रहे ,संघर्ष कर शराबबंदी लागू कराई आज उन्हीं की धरोहर को बचाने के लिए शराब किंग ’ किंग फ़िशर’ के मालिक विजय माल्या का शराब से कमाया पैसा ही काम आया । वाह री सरकार , वाह रे हमारी गाँधी दर्शन की समझ । जय हो ,जय हो ....

Ratan Singh Shekhawat said...

बापू हम वाकई शर्मिंदा हैं

महेन्द्र मिश्र said...

वाकई हम शर्मिंदा है जो राष्ट्र पिता बापू की स्मृति को सुरक्षित न रख सकें ...आभार

MANVINDER BHIMBER said...

बापू हम वाकई शर्मिंदा हैं

विष्णु बैरागी said...

सटीक और बिलकुल ठीक कहा आपने।

संगीता पुरी said...

सही कहा ...

uday said...

raura ek dum thik kahale bani..hum bapu ke istemal kail gail saman ke daam aur bhav laga sakale bani..lekin unkar darshan aur ahinsa ke sadesh ke koi kaise kharid sakela bhala...unkar ahinsa ke sadesh ke to pure vishav men hai toha...ta hum bhi ek bar bolatani jai ho bharat ke aur jai ho rashtrapita mahatma gandhi ji ke......

kundan shashiraj said...

आपके विचार हमेशा मन को सोचने के लिए मजबूर करने वाले होते हैं..

Jayant said...

बापू उन्हे माफ करना
वो नहीं जानते हैं कि उन्होने क्या किया

बापू हमें माफ करना
कि हम आपको आपकी ऐनक घड़ी से जानते हैं
आपके आदर्शों आपके विचारों को हम
आप के छपे हुए चित्र वाली
रिश्वत से कम आंकते हैं

Bhuwan said...

दो अक्टूबर और तीस जनवरी को श्रधांजलि देने के सरकारी कार्यक्रम के अलावा बच्चो की किताबो में जीवनी के तौर पे और बाद में राजनीतिशास्त्र और इतिहास में पढने के बाद अब मुन्ना भाई के साथ बापू को याद कर रहे है