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Monday, March 9, 2009

इन मुशर्रफ जैसों...इमरान जैसों का क्या करें


पाक़िस्तान के क्रिकेटर इमरान ख़ान को मैदान पर एक जुझारू... जीत के लिए एक जिद्दी ख़िलाड़ी के रूप में देखा था... जो जीत के लिए मैदान में जमकर पसीना बहाता था। ख़िलाड़ी के तौर पर इमरान कभी विचलित नहीं दिखे... भ्रमित नहीं लगे... भटके हुए दिशाहीन इमरान कभी नहीं दिखे। लेकिन पाक़िस्तान की सियासत में जाकर दुनिया के सामने इमरान का एक नया चेहरा उभरा है। सियासत में जाने के बाद इमरान का जुझारूपन कहीं खो गया। इमरान विचलित और विक्षिप्त दिखने लगे... पाक़िस्तान की सियासत में एक दोयम दर्जे का खिलाड़ी... जिसकी कोई राजनीतिक हैसियत नहीं। इसे इमरान ख़ान के हालिया बयानों से समझा जा सकता है। स्वात घाटी में तालिबान के सामने पाक़िस्तानी सरकार के घुटना टेक देने के बाद इमरान का बयान आया कि तालिबान को लेकर भ्रामक प्रचार किया जा रहा है।... इससे ऐसा नहीं होगा कि स्वात घाटी की स्थिति बेहद ख़राब हो जाएगी और वहां अराजकता आ जाएगी। (इमरान उसी स्वात घाटी के बारे में कह रहे थे जहां हाल में पाक़िस्तान सरकार ने संघर्ष विराम का फैसला किया। स्वात घाटी हाल के दिनों में उस वक्त चर्चा में आया जब तालिबान ने उसका हुक्म नहीं मानने वालों को सरेआम सिर काटकर उनकी लाशों को ख़ूनी चौक पर लटका दिया। ...तालिबान पर कई पुस्तकें लिखने वाले पाकिस्तानी लेखक अहमद राशिद मानते हैं कि तालिबान के साथ युद्ध विराम पाक़िस्तान के लिए ख़तरनाक है... ऐसे संगठन संघर्ष विराम के दौरान अपना विस्तार करते हैं और उन्हें एकजुट होने का मौका मिलता है।) इमरान ख़ान उसी तालिबानी प्रभाव को कोई बड़ा ख़तरा मानने से इनकार करते हैं। इमरान यहीं नहीं रुकते... उनका कहना है कि पाक़िस्तान में श्रीलंकाई क्रिकेटर्स पर हमले में विदेशी ताकते हैं... इन विदेशी ताक़तों में भारत, श्रीलंका या अफ़गानिस्तान भी हो सकता है। अपने आरोपों को पुष्ट करने के लिए इमरान का दावा भी कम दिलचस्प नहीं है... उनका कहना है कि पाकिस्तानी फौज 2004 में जब से पाकिस्तान के कबिलाई इलाकों में गई... तभी से आतंकी हमले शुरू हुए। उसके बाद आतंकी हमलों की पाकिस्तान में कई घटनाएं हुई... जो एक जैसे थे। लेकिन श्रीलंकाई खिलाड़ियों पर जिस तरह से हमला हुआ... उसका अंदाज जुदा था। यही बताता है कि हमले में विदेशी ताकतों का हाथ है। इमरान ने एक ही झटके में गूढ़ प्रश्नों का नायाब हल निकाल लिया।
यह कितना अजीब है कि एक पड़ोसी होने के नाते हम पाक़िस्तान में लगातार बिगड़ती स्थिति पर न केवल अफसोस जाहिर कर रहे हैं बल्कि पाक़िस्तान के कमजोर होने से भारत की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं रह जाएगी। इसके बावजूद पाकिस्तान के हुक्मरान और वहां की कुछ बड़ी शख़्सियतों को या तो अपने देश की स्थिति का अंदाजा नहीं या फिर इसे जानना नहीं चाहते।... अपनी हालत को नजरअंदाज करते हुए वे लगातार भारत की स्थिति ख़राब बता रहे हैं। ताज़ हमले के बाद पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने भारत पर युद्धोन्मादी वातावरण बनाने का आरोप लगाया था। ...अब इंडिया टुडे के समारोह में हिंदुस्तान आए यही परवेज मुशर्रफ ने हिंदुस्तान में मुस्लिमों की हालत ख़राब बताकर एक नया शिगूफ़ा छोड़ने की कोशिश की। वे आगरा समझौते की तरह ही भारतीय मीडिया के इस्तेमाल का मंसूबा बांधे आए थे।....उन्हें लगा कि मुसलमानों की बात उठाकर हिंदुस्तान में भी तालियां बटोर लेंगे और विश्व के नक्शे पर एक सर्वमान्य नेता बनकर उभरेंगे। ...शायद ऐसा ही उनका इरादा रहा होगा। वो तो भला हो राज्यसभा सदस्य महमूद मदनी का, जिन्होंने मुशर्रफ को दो- टूक जवाब दिया। मदनी ने मुशर्रफ से कहा कि आप अपनी और अपने देश की चिंता कीजिए... हिंदुस्तान में मुस्लिमों का हक़ सुरक्षित है...अपनी सियासत चमकाने के लिए इस तरह के बयान देकर हिंदुस्तान के मुस्लिमों को बांटने की साजिश मत कीजिए। ... जवाब सुनकर परवेज़ मुशर्रफ का चेहरा उतर गया।... मुशर्रफ को सही वक्त पर जवाब मिला था। लेकिन इसके बाद भी हम मुशर्रफ जैसों... इमरान जैसों से उम्मीद करें कि भविष्य में वे बेहतर तरीके से पेश आएंगे... बेकार है।

4 comments:

Dipti said...

पाकिस्तान के ये हालात और उसके बाद वहाँ के नेताओं के इस तरह के बयानों से वहाँ कि आम जनता पर तरस आता है। लेकिन, असल में हमारी हालत भी फ़िलवक़्त कुछ ऐसी ही है। हमारे यहाँ भी मुशर्रफ़ और इमरान जैसे बयान बहादुरों की कमी नहीं हैं।

Bhuwan said...
This comment has been removed by the author.
Bhuwan said...

पाकिस्तान के साथ यही दिक्कत है. वहां के राजनेता जिस दिन ये मान लेंगे की समस्या उनके अन्दर ही है उस दिन वहां के हालत में बदलाव आने लगेंगे. सब कुछ जानते देखते हुए भी अनदेखा करने का उनका रवैया ही उनको विनाश की राह पर ले जा रहा है.

Bhuwan said...

सर, प्रोफाइल में फोटू तो बहुत झकास लगाई है... :-).