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Wednesday, March 25, 2009

तोड़फोड़ मामलों के विशेषज्ञ वरुण भाई की सेवा में


विरोधी कुलबुला रहे हैं। मीडिया वाले रह- रहकर चिचिया रहे हैं... कभी यहां से बाइट ले तो कभी वहां से। वीजुअल्स के नाम पर ज़हरीली सीडी जमाने को दिखा रहे हैं। देखो- देखो एक और बौरा गया। सियासत के गलियारों में एक और उन्मादी नफ़रत का नश्तर लेकर खुलेआम घूम रहा है। विरोधी कहने लगे कि निकालो इसे सियासत के गलियारों से बाहर। कहने लगे कि बीजेपी की चाल है... नया ड्रामा है। साथी दल कह रहे हैं कि संभालो भाई इसे... ये तो हमारा भी सत्यानाश कर देगा। सब तरफ से दुरदुराया जा रहा था तो पार्टी खामोश थी। ... मगर हिंदू शिरोमणि बाला साहब तो जैसे नफरत के इस नए अवतार पर फिदा हो गए। उन्होंने अभयदान देकर कहा कि –लगे रहो वरुण भाई।...अब तो बीजेपी भी चैतन्य हो गई...और बयान उछाल दिया कि पार्टी उनके साथ खड़ी है। कांग्रियों की हालत सांस- छुछुंदर –सी थी। सो, सतर्कता के साथ कह दिया कि ये तो संगत का असर है।... संगत बुरी हो तो हौले- हौले हो ही जाता है बुरा आदमी। हिंदुस्तान तो क्या पाक़िस्तानी ब्लॉगर्स भी कह रहे हैं कि मुसलमानों पर नफरत का तोप दागा जा रहा है। जयश्री राम... गीता की कसम खाकर कहता हूं, मैं उसका हाथ काट दूंगा। ...इशारे से ख़बरदार भी कर रहे हैं... अपने ही एक हाथ की कलाई पर दूसरे हाथ की उंगलियों से काट- काट डालने का इशारा करते हैं। ...बड़े गहरे संकेत हैं।... खुद वरुण के लिए। ...नाम में गांधी इसलिए नहीं लगा रहा हूं कि गांधी की आत्मा को बार- बार कलपाने का पाप नहीं लेना चाहता। ...तो मुसलमानों को जाने क्या- क्या बताते हुए गीता की कसम खाते हैं। इशारा अपनी ही कलाई को काटकर करते हैं। ...शरीर से एक हाथ को जुदा करने का इरादा है वरुण का। ...खूब थुक्का- फजीहत हुई। होनी ही थी। रातोंरात वरुण की टीआरपी आसमान छूने लगी। तुलना होने लगी संजय गांधी से... सॉरी.. गांधी परिवार के इस मूर्धन्य नेता के नाम में भी गांधी लगाने के लिए फिर- फिर क्षमा चाहूंगा। हां तो... संजय ने अपने समय में जबरन नसबंदी की मुहिम चलाई...और शिकार हुए वही। लगता है संजय की आत्मा भी बीजेपी के आसपास ही बसती रही होगी। चूंकि हिंदू हृदय सम्राटों का अपना संगठन बीजेपी उस वक़्त नहीं था... लेकिन नफ़रत की सियासत तो थी। घृणावाद तो था। सो, संजय अपने हिसाब से नफ़रत का मोर्चा संभाल रहे थे।... जाने भी दो अब संजय को, वरुण पर आते हैं। संजय विमान दुर्घटना के शिकार क्या हुए... गांधी परिवार में बहू मेनका का दम घुटने लगा... वहां शक्तिशाली सास इंदिरा का राज था। सो, मेनका अपने इसी नन्हे से वरुण को कमर पर लादे उस घर से बाहर आ गईं... उस समय रविवार के मुखपृष्ठ पर यही तस्वीर छपी थी- मां मेनका अपनी कमर पर वरुण को लादे ससुराल से बाहर आ रही हैं। गोरा –चिट्टा गुड्डा सा दिखता वरुण।... फिर एक लंबा कट।
...वर्षों बाद अचानक वरुण जमाने के सामने आए। लाल टीका लगाए बीजेपी के भगवा झंडे के साथ।... ठीक विरोधी विचारधारा वाली पार्टी के साथ खड़े होकर कोई खलबली पैदा नहीं कर सके। पार्टी ने टिकट भी नहीं दिया और न ही संगठन का कोई अहम ओहदा... शक्तिशाली इंदिरा गांधी का परपोता फ़कत एक सीट के लिए तरस गया... जब टिकट मिला तो जीत की छटपटाहट और बढ़ गई। हारने के बुरे- बुरे ख्वाब आने लगे.... कसम से। तो ऐसे में वरुण भाई का कोई सर्किट उनके कान में फुसफुसा गया- भाई ऐसे नहीं चलेगा... कहानी में कुछ झोल... कुछ सनसनी... कुछ काटा-पीटा न हो तो टीआरपी मिलेगी कहां से... राज भाई का उदाहरण दिया... मोदी भाई की नज़ीर दी... क्या चकाचक राजनीति चल रही है इनकी। वरुण भाई को बात समझ में आ गई। अब उनके ख्वाब में मोदी भाई –राज भाई की शोहरत में चमकती- दमकती दुनिया आने लगी। महत्वाकांक्षा परवान चढ़ने लगी। ... एकबार भगवाधारियों ने मंदिर के लिए राम की कसम खाई और दिल्ली की गद्दी पर राज किया। ...अबकी वरुण भाई ने गीता की कसम खाई है तो देखिये आगे- आगे होता है क्या।

6 comments:

Anonymous said...

मैं तो सोच रहा था कि हुंआ हुआ चिचियाने वाले सारे सियार अब तक तो थक कर शान्त बैठ गये होंगे लेकिन तुमने तो अभी ही चिचियाना शुरू किया है, चलो तुम्हें भी झेल लेते हैं

एक बात बताओ, किसका हाथ काटने के लिये कहा था वरुण ने? जो हाथ हिन्दुओं पर उठेगा उसका. क्या किया जाना चाहिये उठने वाले हाथों के साथ? चांटा मारने वाले का क्या करना चाहिये?

कोई तुम्हारे बाप के गाल पर तमाचा लगाये तो क्या करोगे? अपना गाल पेश करोगे़? अपने बाप का गाल पेश करोगे? या उस उठने वाले हाथ को मरोडोगे?

रंजना said...

Rajniti...baap re baap....

Madhaw Tiwari said...

जीवन में हमारे सामने कई तरह के सवाल आते हैं... कभी वो अर्थ के होते हैं... कभी अर्थहीन.. अगर आपके पास हैं कुछ अर्थहीन सवाल या दें सकते हैं अर्थहीन सवालों के जवाब तो यहां क्लिक करिए

संगीता पुरी said...

यही तो है आज की राजनीति ...

Jayant said...

भाई आप और भाई अनॉनींमास कुछ भी कहें मैं तो कहुंगा कि वरुण गांधी... बीजेपी के वरुण बन गए हैं... और वरुण की पीठ पर बैठ अगर चुनाव का समुद्र पार हो जाए तो दिक्कत कैसी..... सो शुरुआती हां-हां--नाना के बाद बीजेपी भी ताल ठोक कर आ गई है मैदान में ये सोचकर कि चलो इसी बहाने ही सही.......
और भाई अनॉनींमास रही बात चांटा मारने या फिर मरवाने की..... तो मै तो यही मानता हूं कि आपको ऐसा कोई काम करना ही नहीं चाहिए कि कोई आपको चांटा मारे.... और फिर भी कोई फिजूल में पंगा ले रहा हो तो फिर चांटे के जवाब में हाथ तोड़ देने में भी कोई परहेज़ नहीं है... गांधीजी या किसी भी महापुरुष के विचारों को मानने के लिए आप हर्गिज बाध्य नहीं हैं... लेकिन उनके विचारों को किसी को धमकाने के लिए इस्तेमाल करना भी तो गलत है न मेरे भाई.......????य

Suresh Chiplunkar said...

संजीव भाई से यासीन मलिक, आज़म खान, अबू आज़मी और इमाम बुखारी के बयानों/भाषणों के विश्लेषण का इन्तज़ार रहेगा… तब पता चल ही जायेगा कि "पहल" किसने की और वरुण किसके हाथ काटने को कह रहे हैं…। हिन्दुओं के पक्ष में बोलने वाले को हमेशा गाली ही खाने मिली है इस देश में… इसमें नया कुछ भी नहीं… फ़िर भी संघ की ताकत बढ़ती ही जा रही है… बेनामी जी हम अपना काम चुपचाप करते रहें, मीडिया/अखबार/पत्रिकाओं/ब्लॉग में हिन्दुओं या हिन्दू हित की बात करने वाले की जितनी आलोचना की जायेगी यह उतना ही तेजी से प्रसारित होगा… जनता के बीच जाने से जनमत बनता है, वहीं पर यह बात बताना चाहिये कि देश में सर्वाधिक दंगे कांग्रेस शासनकाल में ही हुए हैं, यहाँ ब्लॉग पर "बुद्धुजीवियों" को समझाने में अपनी ही उर्जा नष्ट होगी… भाजपा और संघ का पक्ष जाने बिना आलोचना करने वालों को कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है, जिस दिन ये लोग इस्लामिक आतंकवाद की "आँच" को अपने दरवाजे तक महसूस कर लेंगे, खुद-ब-खुद कांग्रेस के दुश्मन बन जायेंगे, मगर तब तक इनकी आँखें खुलने वाली नहीं हैं…