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Saturday, March 28, 2009

...फिर जय श्रीराम


कहते हैं कि काठ की हांडी बार- बार तो क्या, दोबारा भी नहीं चढ़ती। लेकिन बीजेपी का मुहावरों और कहावतों पर भरोसा नहीं है। बीजेपी खुद ही मुहावरे गढ़ती है और जमाने के सामने नए उदाहरण पेश करती रही है। हालांकि वरुण मामले को अगर सिलसिलेवार ढंग से देखा जाय तो ये बीजेपी का चुनावी प्रपंच भर लगता है, जिसमें जज्बातों को खूनी अंजाम तक पहुंचाने की कोशिश साफ नजर आती है। आईए सिलसिलेवार ढंग से देखते हैं वरुण के बहाने खेले गए हिंदू कार्ड की-

- अपने विवादास्पद भाषण को लेकर पीलीभीत में सरेंडर करने वाले वरुण गांधी ने कानून को लेकर अपने विचार जाहिर किये। उन्होंने कहा कि कानून का सम्मान करते हुए वो सरेंडर करने आए हैं। कानून के दायरे में अपने हिंदु भाईयों और समाज के लिए लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया। ...लेकिन यही वरुण गांधी अपने विवादास्पद भाषण में कहते हैं कि हिंदुओं पर उठने वाले हाथ को काट डालेंगे। शायद वरुण गांधी को पता नहीं था कि हिंदुस्तान में कानून का राज है और यहां आरोपी की सजा कानून के तहत तय होती है। और ये अदालत का काम है...वरुण गांधी या उनकी भगवा मंडली किसी को सजा देने के लिए अधिकृत नहीं है।... न ही उनका भड़काऊ भाषण कानून के दायरे में आता है।
- वरुण गांधी ने पहले तो अपने विवादास्पद सीडी को फर्जी बताने की हरचंद कोशिशें की... दिल्ली आकर प्रेस कांफ्रेंस के जरिये भी उन्होंने दावा किया कि सीडी के साथ छेड़छाड़ की गई है। उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह से मुलाकात कर यही बताया कि सीडी फर्जी है... और उन्होंने भरोसा भी कर लिया। बीजेपी ने सांसें रोककर चुनाव आयोग के रुख़ का इंतजार किया। फिर अचानक वरुण और बीजेपी ..दोनों को लगा कि चुनावी समय में यही सीडी उनकी वैतरणी पार लगा सकती है। तो इसका खंडन करना भी छोड़ दिया कि सीडी फर्जी है या उससे छेड़छाड़ की गई है।
- सीडी के जारी होने पर चारों तरफ आलोचना हुई। लेकिन शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने अपने संगठन के मुखपत्र सामना में वरुण की शान में कसीदे पढ़े। बयान में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मानते हुए वरुण की पीठ थपथपाई। बदले में वरुण ने भी बाल ठाकरे का फोन पर आभार जताया। ...अगर सीडी फर्जी थी तो आख़िरकार बाल ठाकरे के किस बात पर मिली शाबाशी को लेकर वरुण ने उनका आभार जताया। भगवान जाने।
- बीजेपी ने शुरू में वरुण गांधी के बयान से पल्ला झाड़ लिया था। बीजेपी इसे वरुण के निजी विचार बताती रही। लेकिन बाद में खुलकर समर्थन में आ गई। यहां तक कि वरुण गांधी जब पीलीभीत की अदालत में सरेंडर करने गए तो उनके साथ यूपी बीजेपी के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र भी थे। इससे समझा जा सकता है कि बीजेपी वरुण के साथ किस तरह से खड़ी है। यूपी में जनाधार खो चुकी बीजेपी को इस मुद्दे पर दोबारा उम्मीद जगी है।
- इस मसले पर बीजेपी का अंदरूनी लोकतंत्र खुलकर सामने आ गया है... और एनडीए के घटक दल भी सवालों के घेरे में हैं। इस बयान की बीजेपी के मुस्लिम नेताओं शाहनवाज हुसैन और मुख़्तार अब्बास नक़वी ने कड़ी आलोचना की। लेकिन बाद में क्यों ये दोनों नेता ख़ामोश हो गए... या उन्हें पार्टी ने किस तरह से ख़ामोश किया। घटक दलों में बिहार की जेडीयू ने आलोचना तो की लेकिन कोई सख़्त रवैया अपनाने से परहेज किया।
- कांग्रेस अजीबोगरीब स्थिति में फंस गई। वरुण गांधी के गांधी परिवार से जुड़े होने की वजह से बहुत आक्रमक नहीं हो पाई। लेकिन बाद में कहा कि आडवाणी चाहें तो इस ड्रामे को खत्म कर सकते हैं क्योंकि इस ड्रामे की पटकथा आडवाणी जी ने ही लिखी है। ...बाकी पार्टी यूपी की मायावती सरकार की तरफ से की गई कार्रवाइयों पर भी नजर रखेगी। ...वाह।

5 comments:

निशाचर said...
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निशाचर said...
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निशाचर said...

शायद आपने आज की दूसरी खबर नहीं पढ़ी. भारत सरकार ने बंगलादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन को आम चुनाव के ख़त्म होने तक भारत आने और मीडिया को साक्षात्कार देने से मना किया है. उन्हें भारत सरकार ने अपना मुंह बंद रखने की चेतावनी भी दी है. आखिर किसलिए ?? तसलीमा ने ऐसा क्या किया है जिसके लिए उसे भारत में शरण नहीं दी जा सकती (या उन्हें चुनावों के बीच भारत नहीं आना चाहिए). साफ़ है, 'महान सेकुलर कांग्रेस' और वामपंथियों के मुस्लिम मतदाता उनसे नाराज हो जायेंगे.

इस तुष्टिकरण को आप क्या नाम देते है- धर्मनिरपेक्षता या शर्मनिरपेक्षता.

जनाब हरियाली सभी को पसंद है लेकिन सावन (वोटों) के अंधे को हरा ही हरा नजर आता है.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

न कांग्रेस धर्म निरपेक्ष है और न ही भाजपा। दोनों का सही स्थान हिन्दमहासागर के तल में है।

Jayant said...

लेकिन तमाम कवायदों के बाद भी हुआ क्या....???? सयाने चौबे जी छब्बे बनने चले थए दुबे बन के लौटे..... बहन जी तो पूरे मूड में लगती हैं कि रासुका लगा कर तीन महीने सलाखों के पीछे भेजने के लिए.....।।।।