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Thursday, April 23, 2009

गश खाकर गिरते- गिरते बचा एंकर

दोस्तों, मैने आपसे वायदा किया था मीडिया जगत के कुछ अंदरूनी किस्सों का। इसमें पांच किस्तें मैं लिख चुका, अब छठी किस्त पेश-ए-ख़िदमत है। सौभाग्य से ये मेरा क़िस्सा नहीं है और न ही मैंने जिस चैनल में काम किया या कर रहा हूं… ये वहां का भी किस्सा नहीं है। लेकिन एक सामान्य ( असामान्य नहीं) से चैनल का एंकर मेरा मित्र दो साल पहले ऐसा फंसा कि उस घटना को लेकर आजतक हलकान है।ः संजीव
एक चैनल में मेरा मित्र बिजनेस प्रोग्राम का एंकर है।...लेकिन जब वो बाहर निकला तो पता चला कि चैनल में क्षेत्रीय न्यूज पढ़ने वाला एंकर समय पर पहुंच नहीं पाया है। उसे फटाफट ड्रेस चेंज करके उसके लिये तैयार होना था। ब्लेज़र बदलकर मेकअपमैन के पास जाकर थोड़ी डेंटिंग- पेंटिंग करवाई और पहुंच गया समाचार पढ़ने। ख़ास दिक़्कत नहीं हुई... पहले भी उसे अपने प्रोग्राम के अलावा किसी दूसरे प्रोग्राम की भी एंकरिंग करनी पड़ी थी। सो, सब ठीक चल रहा था।... तो एंकर जिस समय समाचार पढ़ रहा होता है उस समय टीपी पर वो समाचार लिखा हुआ चलता रहता है... और जब शॉट्स वगैरह चलने लगते हैं तो एंकर के पास थोड़ा –सा वक्त होता है जब वो सामने लगे टीवी स्क्रीन पर उस समाचार को भी देखता है। यूपी के एक शहर की ख़बर थी। ख़बर ये थी कि एक घरेलू -सी ग्रामीण महिला का पति उसे छोड़कर दस वर्षों पहले चला गया... वापस लौटकर नहीं आया। महिला को ससुराल में दिक़्कत हुई तो वो मायके जाकर वर्षों से रह रही थी। लेकिन महिला को पता था कि उसका पति दिल्ली में है और जैसा कि वो महिला कह रही थी कि एक कंपनी में बड़े पद पर है... वहीं साथ काम करने वाली लड़की ने उसके पति को फांस लिया है...वो पैंट- शर्ट पहनकर ऑफिस जाती है। महिला पानी पी- पीकर उस लड़की को कोस रही थी... और अपने पति को भी बख़्शने के अंदाज में कतई नहीं दिखती थी। महिला के आसपास गांव वालों की भीड़ थी... जो कह रही थी कि लड़के का पता चले तो लाठी से कूच देंगे... जो उनके गांव की एक लड़की का जीवन बर्बाद कर खुद दिल्ली में अय्याशी कर रहा है।
अब एंकर महोदय जो थे उन्होंने दो- चार सांस में स्क्रिप्ट का एंकर रीड पढ़ दिया और जब वीजुअल्स चलने शुरू हुए तो वो भौंचक रह गया। कभी टीवी स्क्रीन को गौर से देखता तो कभी उस महिला की बाइट पर कान देता। समाचार में उस महिला के पति के कॉलेज जमाने की पास्टपोर्ट साइज तस्वीर दिखाई गई तो एंकर जैसे गश खाते- खाते बचा...पीसीआर में उसकी हालत एकदम से ख़राब हो गई। दरअसल, ये पूरी कहानी उस एंकर की अपनी कहानी थी। महिला जो थी उसकी पत्नी थी जिसके साथ तक़रीबन पंद्रह साल पहले जिसकी शादी हुई थी। ....लड़के के माता- पिता के काफी जोर देने के कारण उसने शादी तो कर ली लेकिन एक साल के भीतर एकबार जो दिल्ली आया तो फिर एक्का-दुक्का मौकों पर घर वापस गया। दिल्ली में उसने एक चैनल से दूसरे चैनल की नौकरी करते –करते एंकर हो गया और इसी दौरान उसने एक अपने साथ काम करने वाली लड़की से शादी भी कर ली। ...अब सुखी है। पता नहीं आपको उसका किस्सा कैसा लगा लेकिन शायद ये किसी के साथ भी हो सकता है।

9 comments:

Nirmla Kapila said...

bahut rochak kisa hai kahaniuon me to aksar milta hoga magar yatharth me pehli bar suna hai

परमजीत बाली said...

बहुत रोचक!

ajay kumar jha said...

yadi ye hakeekat thee to kamaal hee thee aur ittefaak to bhee kamaal tha, jo bhee tha , tha behad rochak. badhiyaa laga...

संगीता पुरी said...

सिर्फ फिल्‍मों में ही नहीं .. वास्‍तविक जीवन में भी संयोग हो जाया करते हैं .. मजेदार रहा।

सतीश पंचम said...

रोचक । मान लो यदि वह महिला न्यूज रूम में उस समय दिखिल हो लेती तो शायद उस चैनल की लाईव न्यूज सचमुच ही लाईव हो जाती। एंकरवा के कपडे वपडे फटते सो अलग :)
TRP बढती सो अलग :)

विनीत कुमार said...

खबर का असर....

रंजना [रंजू भाटिया] said...

यह तो ब्रेकिंग न्यूज़ बन गयी :) रोचक वाकया है

Dipti said...

ब्रेकिंग न्यूज़

Brijesh Dwivedi said...

behad rochak....