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Sunday, July 12, 2009

...ई नीतीशे बदलेगा बिहार!

दोस्तों, ऑफिस से लौटते वक़्त शाम में अक्सर नोयडा के सेक्टर सोलह में इंडिया टीवी के कोने पर खड़ा होने वाले भुट्टा वाले के यहां रुककर एकाध भुट्टा जरूर खाता हूं। उसके ठेले पर एक टीन का बड़ा ड्रम है जिसपर लिखा है छिल्ला... यानी मक्के के उबले हुए दाने। पांच रुपये में एक भुना हुआ भुट्टा देता है... नमक और नींबू निचोड़कर। तबीयत खुश हो जाएगी। और उसकी बातें जरा सुन लें तो ग़जब का बोध होता है। पहले मैं अपने काम से काम रखता था... एकदिन खुद उसने टोका तो बातचीत शुरू हुई। पूछा कहां काम करते हैं... तो बताया। उसने कहा कि उस चैनल में उसका कोई रिश्तेदार इलेक्ट्रीशियन है ...कोई महतो जी। बिहार का रहने वाला है। जब बताया कि मैं भी बिहार का हूं तो पूछा कितना कमा लेते हैं?... मैने कहा कि बस परिवार चल रहा है... पूछा कि दस हजार तो मिल ही जाता होगा?... मैने कहा कि हां पंद्रह साल से नौकरी कर रहा हूं तो इतना तो मिल ही जाएगा। फिर बात निकली बिहार पर। उसने कहा कि नीतीश सरकार ठीक काम कर रही है... मैने हामी भरी। ...मगर नितीश सरकार से उसे भी शिकायत है कि ...मध्यमा पास लोगों को टीचर की नौकरी दे दी। क्या करेगा ऐसा टीचर?... जब खुदै नहीं पढ़ा है तो बच्चों को तो चौपट ही कर देगा न ? उसने कहा कि अगर कुछ साल और रह गया नितीश तो हम सबको यहां परदेस में बात- बोली सुनने की जरूरत ही नहीं रह जाएगी... मगर कहीं फिर लालू आ गए तो मुश्किल हो जाएगी। उसकी माने तो पिछले पंद्रह साल से इसी इलाके में भुट्टा बेचता रह गया... कभी मेन रोड पर ठेला लगाता था... पुलिस वाले को रोजाना सौ रुपये देता था मगर अब पैसा लेकर भी मेन रोड पर ठेला लगाने नहीं देता है और मारकर भगाता भी है... कईबार उसके ठेले को पलट भी दिया गया। सामान का नुकसान हुआ और उसका मान आहत हुआ। नितीश के बिहार को लेकर वह उम्मीदों से भरा हुआ है। उसे नहीं मालूम की बिहार में विकास दर कैसा है लेकिन उसे अहसास है कि बिहार बदल रहा है। मैने कहा कि तुम्हारे हिसाब से कितने साल बाद बिहार पूरी तरह से बदल जाएगा... उसने कहा कि नितीश को अगर दूसरी बार भी शासन मिल गया तो जरूर बदलेगा... हम भी यहीं हैं और आप भी यहीं हैं... देख लेना।... क्या वाक़ई ऐसा है?

4 comments:

Sarvesh said...

Ummid par duniya kaayam hai.
Unke predecessor se to wo bhi ummid nahin thi.

Bhuwan said...

दरअसल बदलाव और उम्मीदें एक दूसरे के साथ चलती हैं... जब बदलाव आता है..तो लोगों की उम्मीदें उससे जुड़ जाती हैं. लोग कुछ अच्छा चाहने लगते हैं..बेहतर चाहने लगते हैं. ऐसा बिहार में ही नहीं ये पूरी दुनिया में होता आया है. हर क्रांति बदलाव के लिए की जाती है.. उसमे सत्ता और व्यवस्था में बदलाव करने की गुंजाईश रहती है. बिहार की बात करें तो कांग्रेस शासन के बाद जब जनता दल की सरकार आई तो जनता ने बदलाव की चाहत पाली थी.. जनता दल से आरजेडी के राज में बिहार में क्या बदलाव हुए ये दुनिया ने देखा. अब जब विकास के नारे और दावे के साथ नीतिश ने सत्ता संभाली तो लोगों ने उनसे अपेक्षाएं पाली हैं. ये बात भी सही है की पंद्रह बीस सालों में पिछड़ा बिहार पॉँच सालों में एक दम से आगे नहीं आ सकता लेकिन जनता तो जनता है.. वो सह सकती है.. झेल सकती है और बदलाव की उम्मीद कर सकती है...

भुवन वेणु
लूज़ शंटिंग

uday said...

sir, namaskar
bahut din bad aap se mil raha hun iske lie chhama prarthi hun...yad to aap har pal aate hain..lekin bich men ghar jane ki wajah se aapse mil nahi..paya...bhute wale aur aapke bich hui batchit ko padha..kahte hain samay ke sath pariwartan prakriti ka niyam hai..bihar men bhi wahi hua hai..logon ki nitish sarkar se aash bandi hai..ye ummid jagi hai ki apana bihar badal raha rai..aur wo din ab shaid jyada door nahin jab bihar vashion ko bihari kahlana sharma ki bat nahin..balki garv ki bat hogi....
dhanyabad...uday kumar singh
9811311639

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

उम्मीद पर दुनिया टिकी है,
कभी तो दीनदयाल के भनक पड़ेगी कान।
भगवान सबका भला करें।