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Saturday, August 15, 2009

शीला जी! ऐसा विकास आपको ही मुबारक़


दिल्ली की मुख्यमंत्री को मैं इसलिये जानता हूं क्योंकि वे रह-रहकर दिल्ली में नागरिक सुविधाओं में कमी के लिए बाहरी लोगों के बहाने पूर्वी यूपी और बिहार के मजदूरों, रिक्सा चालकों और ग़रीबों को जिम्मेदार मानती रही हैं। शीला दीक्षित को इसलिये जानता हूं क्योंकि महंगाई, लगातार बढ़ता अपराध, बटला हाउस एनकाउंटर जैसे तमाम मामलों के बावजूद विधानसभा चुनाव में दिल्ली की जनता शीला दीक्षित सरकार पर रीझ गई और दोबारा दिल्ली की गद्दी सौंप दी। ... लेकिन उन्हें नये कारणों से मैं जानूंगा। शीला दीक्षित ने तरक्की और विकास को लेकर नई स्थापना दी है। उन्होंने विकास और महंगाई का अनोखा संबंध देश की मूरख जनता को समझाया है। अद्भुत बिल्कुल मौलिक, खालिस कांग्रेसी परिभाषा उन्होंने गढ़ी है। उत्तर प्रदेश के रामपुर में गई शीला दीक्षित ने लगातार बढ़ती महंगाई की वजह बताई। शीला दीक्षित की मानें तो देश चूंकि बड़ी तरक्की कर रहा है इसलिए महंगाई बढ़ रही है। उनके कहने का लब्बोलुबाव था कि आज लोग विदेशों में शॉपिंग करते हैं, जो हमारी तरक्की का सबूत है।
यानी, हम जितनी तरक्की करेंगे, महंगाई उतनी बढ़ेगी। यानी, हमारे विकास दर के साथ महंगाई दर भी कुलांचे भरेगा। यानी, हमारी अमीरी के बरअक्स ग़रीबी का ग्राफ भी बढ़ता जाएगा। यानी, हिंदुस्तान में अनाज खा-खाकर अघाए लोगों की संख्या जितनी बढ़ेगी, कुपोषण पढ़ेगा और भुखमरी की संख्या भी बढ़ेगी। चलिये, शीला जी के बयान का ये मतलब न भी निकालें तो ये तो निकाल ही सकते हैं कि देश तरक्की कर रहा है। महंगाई के बावजूद (बकौल शीला जी)। देखिये कि शीला जी के उसी तरक्कीशुदा मुल्क़ में बुंदेलखंड आता है। उसी देश में विदर्भ है। उसी हिंदुस्तान में बिहार, बंगाल, छत्तीसगढ़, उड़ीसा जैसे सूबे भी है जहां पिछड़ेपन की स्थिति लगातार भयावह हो रही है। इन राज्यों में शीला जी की दिल्ली की तरह की तरक्की नहीं है.. इन राज्यों में केवल महंगाई और पिछड़ापन है। इन राज्यों में कितने लोग विदेशों में जाकर शॉपिंग करते हैं... शीला जी ही बेहतर बता सकती हैं।
अर्थ नीति जानने वाले शीला दीक्षित के बयान को किस तरह से लेते हैं पता नहीं, लेकिन लगता है कि शीला दीक्षित अभी भी ध्यान बंटाने का कोई प्रभावी सियासी तरीका नहीं जान पाई हैं। महंगाई को लेकर शीला दीक्षित का बयान बचकाना लगता है। लेकिन शीला दीक्षित के उस बयान को लेकर क्या कहियेगा जो वे बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों को लक्ष्य करके देती रही हैं। दरअसल, शीला दीक्षित हमेशा ही बहानों की तलाश में रही हैं। लोग जब दिल्ली में पानी –बिजली की किल्लत की बात कहते हैं तो शीला जी कहती हैं कि दिल्ली में बहुत ज्यादा बाहरी लोगों के आने से ये स्थिति पैदा हुई। लेकिन शीला जी को उनके सचिवों ने बताया या नहीं, रोजी- रोटी की तलाश में दिल्ली आए इन्हीं बाहरी लोगों ने उनके मिशन कॉमनवेल्थ की तैयारियों का जिम्मा उठाए घूंम रहे हैं। चमचमाती सड़कों, फ्लाईओवर, मेट्रो लाइनों से लेकर तमाम जगहों पर इन सूबों से आए मेहनतकश ही दिल्ली के ऐश-ओ- आराम के इंतजाम में लगे हैं। शीला जी ने इन्हीं बाहरी वोटरों को रिझाने के लिए ऐन चुनाव के पहले उन लोगों को दिल्ली में ठौर देने का सब्जबाग दिखाया था जो महाराष्ट्र से पिट- पिटाकर आ रहे थे। दिल्ली के कई विधानसभा इलाकों में इन बाहरी लोगों ( शीला जी के लिए वोटर) की बड़ी संख्या को देखते हुए छठ पूजा के मौके पर अपनी मौजूदगी दिखा आई। अब चुनाव बीते दिनों की बात हो गई तो बाहरी लोगों पर नागरिक सुविधाओं की कमी का ठीकरा फोड़ रही हैं। क्या पता कॉमनवेल्थ गेम्स अच्छी तरह से संपन्न हो जाने के बाद इन बाहरी लोगों को दिल्ली से बाहर का रास्ता भी दिखा दिया जाए। क्या पता आने वाले दिनों में महंगाई के लिए भी कुछ सूबों को यह कहते हुए जिम्मेदार बता दिया जाए वहां के लोग ज्यादा खाते हैं। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश अनाज के आसमान छूते दामों के लिए हिंदुस्तान को यही कहते हुए तो जिम्मेदार ठहराया था। अगर इस रूप में देखें तो शीला दीक्षित का महंगाई को लेकर दिया गया बयान भी आधुनिक, तरक्कीपसंद और मौलिक लगता है। विकास और महंगाई का ये रिश्ता, जो शीला जी ने बताया है... ऐसा ही है तो ऐसी तरक्की शीला जी और उनके अपनों को ही मुबारक़।

4 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

ऐसी तरक्की शीला जी और उनके अपनों को ही मुबारक़।
बहुत सुंदर लेख।
स्वाधीनता दिवस की शुभकामनाएँ..
हैपी ब्लॉगिंग।

gaurav said...

Sheela jee ka yah bayaan behad hasyapad hai, kyonki jab-jab Congress ki sarkaar aayi hai tab-tab desh mein mahangayi badhi hai.Congress ka naara ki "Congress Ka Hath Aam Aadmi Ke Sath" bilkul bakwaas saabit ho raha hai, ise poora desh jaanta hai.
Yahan ki janta ko har baar murkh banaya jaata hai phir bhi inka dimag nahi khulta ki sahi selection kar desh ki tarakki mein bhagidaar bane.

gaurav said...

Sheela jee ka garibon ko mahangayi ke liye doshi batana is bat ka parichayak hai ki congress ki sarkar garib virodhi hai bhale hi congress ka nara hai ki "Congress ka hath aam aadmi ke saath". Yah sirf dikhawa hai.
Lekh achcha hai
Thanks

ramnandan said...

Meri bhi yahi ray hai ki......
Sheela jee ka garibon ko mahangayi ke liye doshi batana is bat ka parichayak hai ki congress ki sarkar garib virodhi hai bhale hi congress ka nara hai ki "Congress ka hath aam aadmi ke saath". Yah sirf dikhawa hai.
Lekh achcha hai
Bahut-bahut dhanyawad
Ramnandan