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Friday, January 29, 2010

देश को भी मुसर्रतों की जरूरत











अभी टेक्सास से मुसर्रत भाई का जवाबी ईमेल आया। आप नहीं जानते मुसर्रत भाई को... मैं भी नहीं जानता था। लेकिन पिछले दिनों जान गया कि जिन अंधेरी गलियों से सूरज भी कुछ परहेज के साथ कन्नी काट लेता है, वहां भी कई बार मेधा की रौशनी जरूर निकलकर आती है। मुसर्रत अली झांसी के रहने वाले हैं। नाम डॉक्टर मुसर्रत अली है। कैंसर की बीमारी पर रिसर्च करने अमेरिका गए। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की डेमोक्रेटिक पार्टी ने उन्हें अपना टिकट थमाया है। टेक्सास हाउस डिस्ट्रिक्ट 122 से चुनाव लड़ रहे हैं। www.alifortexas.com - पर क्लिक करें तो चुनाव में खड़े होने का उनका मकसद देख सकते हैं। जिसमें उन्होंने तालीम, स्वास्थ्य सहित दूसरी चीजों की तरफ अपने वोटरों का ध्यान दिलाया है।
डॉ.मुसर्रत अली चुनाव के सिर्फ उम्मीदवार भर नहीं हैं। मुसर्रत होने के दूसरे मायने भी हैं। मुसर्रत अली, मेधा की उसी रौशनी का नाम है जो झांसी की बेहद तंग गलियों से निकलकर आया है। आप विश्वास करेंगे कि डॉ.मुसर्रत अली के पिताजी दर्ज़ी का काम करते थे। नौ भाई- बहनों वाले परिवार में मुसर्रत, अपने पिता की पहली संतान हैं। मुफ़लिसी से दो- दो हाथ करते हुए मुसर्रत अली ने झांसी के मदरसे में शुरुआती तालीम ली। उसके बाद झांसी के जीआईसी से हाईस्कूल और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से बायोकेमेस्ट्री में एमएससी की। पिता चाहते थे कि मुसर्रत डॉक्टर बनें लेकिन उनका इरादा कुछ और था। मुसर्रत के लिए ये तालीमी सफ़र आसान नहीं था। ग़रीबी से पैदा होने वाली चुनौतियों ने उनका कड़ा इम्तहान लिया। लेकिन मुसर्रत ने छात्रवृत्ति के सहारे उन कठिनाइयों से पार पा लिया। कैंसर पर रिसर्च के लिए पेरिस सहित दूसरी जगहों पर रहे। कामयाबी के बाद झांसी में रह रहे उनके परिवार की हालत भी सुधरी। बुजुर्ग पिता, दर्जी का काम छोड़कर अब कपड़ों का व्यवसाय कर रहे हैं। भाई और भतीजे के लिए भी उनकी कामयाबी खुशियां लेकर आई।
इन सबसे अलग मुसर्रत अली ने अब राजनीति में उतरने का फ़ैसला किया। मेरे लिये यह जानकारी एक सवाल की तरह बार- बार आती है। हमारे देश का सियासी ढांचा बदलने के लिए पढ़े- लिखे और जमीन से उठकर आए लोगों को कब टिकट मिलेगा ?... क्या ये अपने देश की राजनीतिक पार्टियों के लिए संदेश नहीं है, जो अबतक जाति, धर्म और पैसों की ताकत देखकर अपने उम्मीदवारों को चुनावी अखाड़े में उतारते हैं? (आसपास लगी तस्वीरों को देखिये। उसमें डॉ.मुसर्रत अली के पिता, भाई- भतीजे और उस मदरसे की तस्वीर है, जहां उन्होंने पढ़ाई की थी। दरअसल, कैप्सन लगाने का तरीका मैं अबतक नहीं जान पाया हूं इसलिये असुविधा के लिए खेद है)

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