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Tuesday, February 9, 2010

पब्लिक तो बच्चा है जी!

आप उत्तर भारतीय हैं तो फ़क़त इसबात पर ख़ुश हो सकते हैं कि कांग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी उनकी हिमायत में आ गए हैं। मराठी बनाम उत्तर भारतीयों के खूनी खेल में अबतक तमाशबीन बनी कांग्रेस ने चुप्पी तब टूटी जब शिवसेना के कागजी शेरों ने गांधी परिवार पर व्यक्तिगत हमला बोल दिया। राहुल गांधी ने हाल ही में पटना में कहा कि `मुंबई पर सबका हक़ है। मुंबई आतंकी हमले के दौरान बचाव के लिए गई एनएसजी की टीम में बिहार, उत्तर प्रदेश के भी कई जवान थे। उस समय मराठी राजनीति करने वाले नेता कहां थे ?'
राहुल गांधी के इस ताजा रुख़ के कई निहितार्थ हैं। उनके इस बयान ने कांग्रेस और केंद्र सरकार की कई मुश्किलें कुछ आसान कर दी हैं। राहुल गांधी के बयान के मर्म को समझने के लिए दो चीजें बहुत अहम हैं। अव्वल, राहुल गांधी का यह बयान किस वक़्त आया है? साथ ही यह भी समझने की भी जरूरत है कि राहुल गांधी ने किस जगह पर ये बयान दिया ? राहुल गांधी ने मराठी बनाम उत्तर भारतीयों के मसले पर तब जुबान खोली जब महंगाई के मसले पर कृषि मंत्री शरद पवार, अपनी ही यूपीए सरकार की खासी किरकिरी करा रहे थे। शरद पवार, महंगाई पर अपनी भविष्यवाणियों से कांग्रेस को रह- रहकर डरा रहे थे। आम जन के साथ कांग्रेस के हाथ का दावा, छलावा साबित हो रहा था।
दरअसल, यूपीए सरकार और कृषि मंत्री शरद पवार के अलग- अलग सुरों के पीछे भी बारीक राजनीति है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और एनसीपी, दोनों ही सत्ता में आ गई। जाहिर है कि महाराष्ट्र की राजनीति तक सिमटे शरद पवार सुविधाजनक स्थिति में आ गए लेकिन महंगाई पर अपनी भविष्यवाणियों से कांग्रेस की राह उन्होंने जरूर पेचीदा बना दी। महंगाई रोकने के लिए यूपीए सरकार के दावों को शरद पवार यह कहकर रोज-ब-रोज आईना दिखाते रहे कि आने वाले दिन और भी मुश्किलों भरे हैं। काफी फजीहत के बाद सरकार की तरफ से शरद पवार ने देश को भरोसा दिलाया कि पंद्रह दिनों के भीतर जरूरी खाद्य पदार्थों की कीमतें कम होंगी।
इस समय सीमा में खाद्य पदार्थों की कीमतें तो क्या कम होतीं लेकिन महंगाई ने कांग्रेस को सतर्क जरूर कर दिया। इसी वर्ष बिहार विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और चुनावी वर्ष में कमरतोड़ महंगाई का सवाल कांग्रेस के मंसूबों पर पानी फेर सकता है। दूसरे, मुंबई में उत्तर भारतीयों पर महाराष्ट्र नव निर्माण सेना और शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने भले ही कहर बरपाया हो लेकिन राज्य में कांग्रेस- एनसीपी के गठबंधन वाली सरकार इस तमाशे के दौरान ख़ामोश बनी रही। मुंबई की सड़कों पर उत्तर भारतीय टैक्सी ड्राइवरों को निशाना बनाया गया या फिर बिहार के एक उन्मादी युवक को किसी आतंकवादी की तरह सड़क पर मार गिराया गया, कांग्रेस के नेताओं ने तब भी अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी। उस वक़्त कांग्रेस के सामने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की मजबूरी थी। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को अप्रत्याशित रूप से इसका फायदा भी मिला। शिवसेना और एमएनएस की बंदरबांट में कांग्रेस नफा उठा गई।
केंद्र और राज्य में सत्ता में आने के बाद मराठा क्षत्रप शरद पवार ने कांग्रेस की राह में कांटे बोने शुरू कर दिये। इसकी काट में कांग्रेस के मराठा नेता और राज्य के मुख्यमंत्री अशोक चाह्वाण ने मराठी टैक्सी ड्राइवरों को ही परमिट का शिगूफा छोड़कर कांग्रेस की मुश्किलें कुछ आसान कर दीं। आपको चाह्वाण के बयान की बाजीगरी को समझने में ज्यादा दिक्कत इसलिये नहीं होगी कि फ़ौरन बाद उन्होंने यू-टर्न ले लिया। लेकिन तबतक कांग्रेस को इस मुद्दे पर जितनी तपिश की जरूरत थी, उतनी मिल गई। पटना के दौरे पर गए कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के बयान ने इसी विवाद को और भी हवा दे दी। राहुल गांधी के बयान से उपजे विवाद ने महंगाई के बड़े सवाल को भी बौना साबित कर दिया है। महंगाई के सवाल पर अबतक निरुत्तर हो जाने वाले सरकार के नुमाइंदों से इसबारे में कोई पूछने वाला नहीं है। राहुल के बयान ने दाल- रोटी की छटपटाहट में उठते सवालों को इलाकाई झगड़े के शोर में तब्दील कर दिया। आप केवल अंदाजा लगाएं कि अगर ताजा विवाद न होता तो सरकार के पास क्या महंगाई को लेकर उठते सवालों का कोई जवाब होता ?

3 comments:

Fauziya Reyaz said...

aapne bahut achha likha hai, superb...great

राकेश पाठक said...

संजीव जी,
बेहद तर्क संगत बात "राहुल के बयान ने दाल- रोटी की छटपटाहट में उठते सवालों को इलाकाई झगड़े के शोर में तब्दील कर दिया। आप केवल अंदाजा लगाएं कि अगर ताजा विवाद न होता तो सरकार के पास क्या महंगाई को लेकर उठते सवालों का कोई जवाब होता ? " राहुल भोले युवराज नहीं हैं न ही वो शुचिता की राजनीति करने जा रहे हैं। सम्मोहन तोड़ने का मंत्र बस मीडिया के पास है बशर्ते वो ईमानदारी बरते।

ramnandan said...

Congress ki chaal ko samajh paana mushkil hi nahi naamumkin bhi hai.Raj Thakrey ko to kuchh kar nahi paayi aur chale hain desh ko chalane.Mahangai aur Kshetriyeta ki Aag me desh ko jhonkne ke liye Congress ko bahut badhai kyon ki congress ki har chaal kaamyaab ho rahi hai.Khoob looto desh ko....