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Tuesday, July 6, 2010

मीडिया, माही और महंगाई

मेरे एक मित्र ने भारत बंद को लेकर एक दिलचस्प सवाल पूछ दिया। उनका कहना था कि रविवार की बजाय सोमवार को भारत बंद के दौरान अगर महेंद्र सिंह धोनी शादी करते तो मीडिया में भारत बंद की हवा निकल जाती। हालांकि मेरा कहना था कि मीडिया में धोनी की शादी का बैंड बज जाता।
रविवार को धोनी की शादी और सोमवार को भारत बंद गुजर जाने के बाद मुझे अपनी ग़लती का अहसास हो गया है। धोनी की शादी चाहे भारत बंद के दौरान होती या फिर मुल्क पर आई किसी हाहाकारी कुदरती आपदा के वक़्त, टीवी स्क्रीन पर धोनी की शेरवानी, घोड़ा और शादी पर पकवान बनाने वाले हलवाई ही नज़र आते।
शादी के दूसरे दिन सोमवार को जब धोनी देहरादून से दिल्ली के लिये रवाना हो चुके थे, कई चैनलों पर उस रिसॉर्ट की तस्वीरें दिखाई जा रही थी। चारों तरफ़ बिखरे बासी फूल और ऊंघते- अनमनाते माहौल में पसरे हुए फर्नीचरों के सिवा वहां आख़िरकार क्या होता?.. वही थे। प्राइम टाइम में कई चैनलों ने इसे दिखाया।
शादी में मीडिया के लिए दरवाजे बाक़ायदा बंद थे। बावजूद इसके खबरचियों ने जान पर खेलकर `ख़ास आपके लिये' शादी की कुछ तस्वीरें हासिल कर ली थी। उन तस्वीरों को कुछ इस अंदाज़ में दर्शकों/ पाठकों के सामने परोसा गया, जैसे ये तस्वीरें न होती तो मीडिया की नाक कट गई होती।
कुछ चैनल धोनी की शादी से उनके क्रिकेट करियर पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बता रहे थे। क्रिकेट विशेषज्ञ बता रहे थे कि कुछ पत्नियां इतनी लकी होती हैं कि मर्द की तक़दीर खुल जाती है। धोनी की पत्नी साक्षी भी उनके लिये लकी होंगी और माही इसबार क्रिकेट वर्ल्ड कप लेकर आएंगे। कुछ चैनल अतीत में क्रिकेटरों के मोहब्बत की दास्तां और शादी के रूप में उसकी परिणति के बारे में बता रहे थे।
मीडिया की मनोदशा पर समाजवादी नेता शरद यादव बिफ़र गए। दिल्ली में सोमवार को भारत बंद के बाद हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने खूब खरी -खोटी सुनाई। उनका कहना था `देश की करोड़ों जनता के सवाल को दरकिनार कर मीडिया, धोनी के ब्याह की ख़बरें दिखाता रहा। महंगाई के ख़िलाफ़ भारत बंद की ख़बरें चैनलों पर बहुत नहीं थी।'
क्या मीडिया को लेकर शरद यादव की शिक़ायत वाज़िब है? मीडिया की जरूरत ड्रामा है। सनसनी है। ग्लैमर है। शरद जी को ध्यान हो न हो, पॉलिटिकल ड्रामे के वक़्त मीडिया में नेता ही तो छाये रहते हैं। अभी हाल में नरेंद्र मोदी को लेकर बीजेपी- जेडीयू की वर्षों पुरानी मुहब्बत में आई तक़रार की ख़बरें क्या कम थीं?
पॉलिटिक्स में अगर ग्लैमर का तड़का हो तो वह भी तो खूब दिखाया जाता है। याद न हो तो अपने शशि थुरूर साहब प्रकरण को ही देख लीजिये।...तो शरद जी, ख़्वामख़ाह मायूस न हों। आपका भी ड्रामे का मंच है। आप भी अपने रंगकर्मियों को तैयार कीजिये। वे जब जलवा अफ़रोज़ होंगे तो टीवी स्क्रीन पर छा जाएंगे। मीडिया हर प्रकार के ड्रामे को महंगाई की मार से हलकान देश की जनता की थाली में परोसने को तैयार है।

1 comment:

Anonymous said...

Dear Dua Sir,

I have seen your programme from Doordarshn Time. Now I am 42 and My childhood remember saw you in TV. Before April 2011 I am vary big fan to you. But Nowdays I saw you programme night 8 PM in NDTV and our gesture and tonding about Anna Hazare movement and Baba Ramdev. This seems that you are not regard them. And your own world see him like our Poltician. Because Our polticien do not like like than movement.

But why not you why you talk Swami Agnivesh like this language. You are a respectable man than why not Swami Agnivesh and Baba Ramdev. You tond and critics vary much Baba ramdev You shuld fast 9 days and journey one Lakh KM and 15 years fasting from Grain. than you pleas speak about them. Some Hindi Reporter Think there voice in original india voice.

So if possible comments.