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Tuesday, July 13, 2010

हैप्पी बर्थ डे पापा...

पत्रकार अमृत उपाध्याय ने अपने पिता को उनके जन्मदिन पर याद किया हैः संजीव
13 जुलाई,मेरे लिए बेहद ख़ास तारीख़, कथाकार और पत्रकार रामेश्वर उपाध्याय का न्मदिन है आज। रामेश्वर उपाध्याय की पहचान एक सशक्त लेखक, जुझारू पत्रकार और ज़िंदादिल इंसान के तौर पर सबसे ज़्यादा रही। चौहत्तर के आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने के साथ-साथ कलम की बदौलत बदलाव की उनकी कोशिश जारी रही। 'मीसा' के तहत नजरबंदी के दौरान ‘नागतंत्र के बीच’ उपन्यास की रचना, चर्चित कहानी संग्रह ‘दुखवा में बीतल रतिया’ और 'गृहयुद्ध' उपन्यास लिखा उन्होंने। बतौर पत्रकार रामेश्वर उपाध्याय ने 'नवभारत टाइम्स', 'धर्मयुग', 'श्रीवर्षा', 'रविवार' और 'न्यूज ट्रैक' जैसे अख़बारों और पत्रिकाओं में लगातार लिखा।‘भोजपुर न्यूज’ अख़बार का संपादन किया। अख़बार और खुद पर कई मुकदमे हो जाने की वजह से उन्होंने वकालत शुरू की।
ये सारी बातें मैं इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि अब से 13 साल पहले 19 अक्टूबर 1997 को रामेश्वर उपाध्याय की हत्या कर दी गई। हत्या के 13 साल बाद, 13 जुलाई को इन बातों का जिक्र इसलिए करना पड़ा क्योंकि उस दौर से इस दौर के बीच का तार कहीं टूट ना जाए। मुझे फ़क्र है बेहद, कि मैं रामेश्वर उपाध्याय का बेटा हूं, और अफसोस, कि उनके जैसे बनने की बचपन से चल रही कोशिश में मैं 99 फीसदी पीछे रह गया। रामेश्वर उपाध्याय से जुड़ी कुछ तस्वीरें और अहमियत वाली कुछ चीज़ें ब्लॉग पर जारी कर रहा हूं। दरअसल मैंने कुछ और लिखा है उनकी याद में, लेकिन यादों को सिलसिलेवार काग़ज़ पर उतारते वक्त काफी लंबा लिख दिया मैंने। अब संकोचवश इसे नहीं जारी कर रहा हूं फिलहाल।(ऊपर:मीसा के तहत नजरबंदी के बाद की तस्वीर)
(कमलेश्वर के साथ तमाम लेखकों की ये दुर्लभ तस्वीर है शायद, तस्वीर में बीच में कमलेश्वर हैं, उनके बायें हाथ के ठीक पीछे प्रेम कुमार मणि, उनके हाथ से सटे ठीक बायें मधुकर सिंह, और इन दोनों के बीच में पीछे रामेश्वर उपाध्याय...तस्वीर में दाहिने से दूसरे नंबर पर, जिनका हाथ एक बच्चे के कंधे पर है, वो हैं हृषिकेश सुलभ , सारे लेखकों को मैं दरअसल नहीं पहचान सका हूं अबतक)

3 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

अब तो रामेश्वर उपाध्याय जी को
नमन ही कर सकता हूँ!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

अब तो रामेश्वर उपाध्याय जी को
नमन ही कर सकता हूँ!

tiya said...

mere the great bday papa ko very very happy wala bdat to u hain........
he is immortal in our memories and in his all litreture.....

i still miss the 10 paise u used to give me.......
love u papa ji ...