Pages

Sunday, May 8, 2011

यहाँ इतना सन्नाटा क्यों है मेरे भाई उर्फ़ रिंगटोन नामा

रिंग टोन और कॉलर ट्यून का अपना अलग -अलग मिजाज होता है। रिंग टोन खुद के लिए होता है जबकि कॉलर ट्यून आपके लिए होता है। रिंग टोन आमतौर पर आप ऐसे चुनते हैं जो आपको पसंद हो। कॉलर ट्यून आप ऐसा चुनते हैं जो आप कॉल करने वालों को सुनना चाहते हों। लेकिन दोनों का ही अपना -अपना व्याकरण है जो आपके पूरे व्यक्तित्व को ज़माने के सामने लाता है। मसलन, मेरे मोबाइल पर इक़बाल का लिखा- लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी, ज़िंदगी शमां की सूरत हो ख़ुदाया मेरी। कॉलर ट्यून लगा नहीं रखा है। लेकिन मेरे कई मित्र हैं जिन्होंने कॉलर ट्यून के रूप में अलग- अलग गीत- गाने लगा रखे हैं... लेकिन सबसे पहला उदाहरण जो बेहद दिलचस्प है। मेरे एक मित्र हैं राकेश राय, हम दोनों में पुरानी मित्रता है लेकिन इधर चार- महीने से उन्हें फोन नहीं कर पाया और न ही उनका फोन आया। ज़िंदगी दोनों की चलती रही लेकिन शायद उन्होंने वीतराग में आकर कॉलर ट्यून लगाया- चांद न बदलता, सूरज न बदला, न बदला भगवान, कितना बदल गया इंसान। ...जब फोन किया तो उन्होंने ठठाते हुए कहा कि इतने- इतने दिनों में खोज- खबर लोगे तो ऐसे ही जले- जले गीत सुनाऊंगा।...लेकिन मजाक छोड़ दें तो यह रिंग टोन के रूप में आपकी पसंद जो है सो आपके व्यक्तित्व की पहचान बन जाती है। मसलन एक मित्र ने कॉलर ट्यून लगा रखा है- राधे- राधे राधे बरसाने वाली राधे। काफी धार्मिक प्रवृत्ति के हैं इसलिये उनकी पसंद में भी इसकी झलक मिलती है। एक छिछोरे मित्र हैं इसलिये उन्होंने कॉलर ट्यून लगा रखा है- डॉन को पकड़ना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है। एक और छिछोरे भाईसाहब हैं जिनका रिंग टोन है- झूम बराबर झूम शराबी, काली घटना है मस्त फिजा है, जाम उठाकर झूम- झूम झूम। गीत -गाने ही नहीं, धुनों में भी इसकी झलक मिलती है। जैसे फास्ट म्युजिक वाले रिंग टोन नये लड़कों के लिए। जबकि आहिस्ता- आहिस्ता कानों में उतरने वाला धुन अधेड़ पसंद करते हैं। लड़कियां और महिलाएं ज्यादातर कॉलर ट्यून लगाने से परहेज करती हैं क्योंकि उन्हें फोन करने वाला पता नहीं किस भ्रम में कब पड़ जाए। मेरी जानकारी में कुछेक साल पहले लगा कहीं रहा था लेकिन फोन कहीं लग गया। फोन किसी महिला ने उठाया और रॉंग नंबर कहकर काट भी दिया लेकिन उससे पहले जो कॉलर ट्यून था वह सुनिये-हुजूर आते- आते बहुत देर कर दी, नसीबा मेरे तूने बीमार-ए-ग़म की दवा लाते- लाते बहुत देर कर दी। मेरी उस महिला को लेकर यही राय बनी कि कोई दिलफुंकी टाइप की चीज़ होंगी। दिलचस्प बात यह है कि लड़के अक्सर बिना कॉलर ट्यून के फोन ही नहीं रखते। उनपर बजने वाले गीत- गानों को सुनकर तो ऐसा लगता है कि हर वक़्त वह किसी- न -किसी को भरमाने के चक्कर में रहते हैं।..चक्कर में पड़ गई तो पड़ गई नहीं तो राधे- राधे।

3 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर!
राधे-राधे!
--
मातृदिवस की शुभकामनाएँ!
--
बहुत चाव से दूध पिलाती,
बिन मेरे वो रह नहीं पाती,
सीधी सच्ची मेरी माता,
सबसे अच्छी मेरी माता,
ममता से वो मुझे बुलाती,
करती सबसे न्यारी बातें।
खुश होकर करती है अम्मा,
मुझसे कितनी सारी बातें।।

Rahul Singh said...

ज्‍यादातर उम्रदराजों के कॉलर ट्यून उनके होनहार बिरवे लगाते हैं. बुजुर्गवार को पता नहीं होता कि क्‍या हो रहा है.

राहुल said...

waise ye caller tone kaisi hai---is fon ki sabhi line vyast hain-kripya do chaar mahine baad fon kijiyega...ek baar maine lko me lagai thi...